वापसी की यात्रा

ये रस्ता कुछ पहेचना पहेचना लग रहा है 

मिठी की खुशबू आ रही है 

बारिसे हमारी रहा देख रही है 

पिपळ , झुरणे , पहाड हमारे स्वागत के लिये आये है 

हम घर पोहचे तो तबता सूरज भी नम हो गया है 

माँ की खुशी दुगणी हो गई है 

हम अपने गावं आगये है 

तितली से बात कर रहे है

शहर का बोझ कम हो गया है 

हम अपने गावं आगये है 

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